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جشن یوم جمہوریہ اور عرب و مسلم ممالک سے بڑھتے ہوئے ہندوستان کے رشتے

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ہندوستان کا جشن یوم جمہوریہ اور عرب و مسلم ممالک سے بڑھتے ہوئے بھارت کے روابط      ہم سب کو معلوم  ہونا چاہئےکہ آج  26/جنوری کو ملک کی 74ویں تقریب یوم جمہوریہ کے موقع پر مصری صدر عبدالفتاح السیسی بطور مہمان خصوصی شرکت فرما رہے ہیں ۔  ہندوستان  کی طرف سےیہ اعزاز حاصل کرنے والے وہ مصرکے پہلے اور عرب دنیا کے چوتھے رہنما ہیں، جبکہ اس سے پہلے دیگر مسلم ممالک کے 15 سربراہان اور قائدین اس تقریب میں شرکت کر چکے ہیں ۔ان میں  سے تین  کا تعلق عرب  دنیا سے اورچار کا تعلق مغربی ایشیا اور شمالی افریقہ خطہ سے (WANA) سے رہا ہے۔ اس پر وقار تقریب  میں  2001میں الجزائري صدر عبد العزيز بوتفليقة،  2003 میں ایرانی صدر سید محمد خاتمی،  2006 میں سعودی فرمانروا شاہ عبداللہ بن عبدالعزیز  آل سعود اور 2017 میں ابو ظہبی کے ولی عہد  شہزادہ محمد بن زاید النہیان نے شرکت کی ہے۔ ان کے علاوہ  اس تقریب کے دیگر چار مہمانان خصوصی کا تعلق جنوبی ایشیا سے بھی رہا ہے ۔پاکستان کے گورنر جنرل ملک غلام محمد نے 1955میں،  پاکستان کے وزیر خوراک و...

سعودی عرب : پسماندہ ماضی، آسودہ حال اور امید افزا مستقبل

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سعودی عرب : پسماندہ ماضی، آسودہ حال اور امید افزا مستقبل

कट्टरवाद vs उदारवाद

  कट्टरवाद vs उदारवाद  कल #ऑस्ट्रिया के प्रसिद्ध शहर #वियना,  में, एक आतंकवादी ने पांच लोगों की हत्या कर दी और 17 को गंभीर रूप से घायल कर दिया। पिछले कुछ दिनों में इस प्रकार की यह तीसरी घटना है, इससे पहले #फ्रांस में इस तरह के हमले हुए थे। यहां यह बात उल्लेखनीय है कि #योरोप में #मुस्लिम_प्रवासियों का जब आगमन शुरू हुआ तो सबसे पहले स्वागत करने वाले देशों में ऑस्ट्रिया और फ्रांस का ही नाम सब अगली श्रेणी मिलता है।  आजकल, जब भी किसी आत्मघाती हमले की सूचना मिलती है तो पूरी दुनिया में #मुसलमानों की पहली प्रतिक्रिया ये होती है कि, "ए अल्लाह, यह हमलावर कहीं मुसलमान न निकल जाए....."क्योंकि हमले के समय तो हत्यारे की असली पहचान किसी को पता नहीं होती है.. ... परंतु जैसे ही समाचारों और सरकारी पुष्टि से यह अस्पष्ट हो जाता है कि हमलावर वास्तव में एक मुसलमान है, तो ईन यूरोपीय देशों में बसे विभिन्न नस्लों और राष्ट्रो के मुसलमानों की अगली प्रार्थना होती है कि "ए अल्लाह , यह कहीं पाकिस्तानी/अफगानी/अरब/फिलिस्तीनी न हो"। ऐसा इसलिए कि पश्चिम में रहने वाले सभी मुसलमानों को सिर्फ अपनी अपनी ...

भारतीय मुसलमानों की पहचान का संकट (Identity Crisis)

09/05/2020 भारतीय मुसलमानों की पहचान का संकट (Identity Crisis) ~आसिफ़ नवाज़ हम कभी इस बात पर विचार विमर्श और गहन चिंतन क्यूँ नहीं करते कि हमारी अस्ल पहचान एवं मूल् परिचय (identity) क्या है? हमारी पहचान क्यूँ नहीं सिर्फ स्थानीय (local) होनी चाहिए? हम क्यूँ नहीं अपने आप को इस भूभाग से जोड़ कर देखते हैं? क्या सांस्कृतिक रूप से पूरा उप-महाद्वीप सभ्यताओं की एक उत्कृष्ट एवं अपार महिमा को प्राप्त नहीं किए हुए? हमें ये भी सोचना होगा कि क्या यह एक घोर अनन्या और तर्क-विरूद्ध मानसिकता नहीं है कि हम अपने आप को इस भूमि से अलग थलग मानते हुए या तो खुद को उन अरबों से जोड़ते हैं जो छेत्री विस्तारवादी (territorial expansionism) सोच ले कर यहां पर सदियों पहले आए थे और फिर चले गए, या फिर अफगान सरदारों & सिपहसालार से जो पूर्ण रूप से एक आक्रमणकारी मानसिकता के धारक थे, या फिर तुर्क योद्धाओं से अपनी पहचान सुनिश्चित करने की चेष्टा करते हैं? धर्म-आधारित एवं विस्तारवादी मानसिकता के आधर पर स्थापित किए गए मुस्लिम राज्यों और साम्राज्यों के पतन के कारण हमारी पहचान का पूर्ण नुकसान हुआ है और हम अभी भी खुद ...

Western Writers & Character-Assassination of the Holy Prophet of Islam

Western Writers & Character-Assassination of the Holy Prophet of Islam A number of Western writers made extensive attempts for character-assassination of the Holy Prophet of Islam by merely highlighting one aspect of the Prophet's life i.e. martial elements of Islam. Whereas, the Prophet combined a number of roles in his person. The most important role he played was of a Prophetic mission for which he was summoned. In addition to that, he was also a state builder, a social reformer and a voice of protection for the less fortunate in the society. The only role that the West mischievously opted and associated with the Prophet was an imposed role by adversarial elements of Meccan people, for which he had no choice but to play under the guidelines drawn by the omnipotent God. When we deeply study various phases of his mission, we discover that during his stay at Mecca, he concentrated on establishing a theological foundation of the Islam with utmost soft and kindest possible...

कोरोना वायरस का प्रभाव और बदलते युग में बदलती मानव जीवनशैली

08/04/2020 कोरोना वायरस का प्रभाव और बदलते युग में बदलती मानव जीवनशैली ~ आसिफ नवाज़   पिछले कई सप्ताह से विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, विशेषज्ञों और विश्लेषकों की #कोरोना_वैश्विक_महामारी से संबंधित अभी तक जो भी लेख एंव विवरण हमें पढ़ने को मिल सका है, उस से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि इनमें से अधिकांश बुद्धिजीवी इस बात पर सहमत हैं कि आने वाले समय में मानव जीवन वैसा नहीं रहे गा जैसा कि कोरोना वायरस से पहले का युग था। इस वाइरस के कारण मनुष्य के जीवन में जो नया परिवर्तन आने वाला है वो भविष्य में कम से कम 12-18 माह तक तो परस्पर प्रभावशाली बना रहे गा और जिस के बहोत से दूर गामी परीणाम प्रमाणित होंगे।  सभी बड़े समारोह, भीड़ भाड़ वाले कारोबार, उड्डयन उद्योग, ट्रेन, पर्यटन, मनोरंजन उद्यान (theme park) होटल, रेस्तरां, बार, कैफे, मूवी थिएटर, के साथ साथ सभी व्यवसाय जहां एक ही स्थान पर 20-30 से अधिक लोगों का जमघटा लगता हो , ऐसे स्थानों से अधिकांस लोग बचने का प्रयास करें गे, जिस से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली को गम्भीर एवं नकारात्मक धक्का ल...

प्राकृत वायरस vs स्वार्थवाद का कीड़ा

प्राकृत वायरस vs स्वार्थवाद का कीड़ा ~आसिफ़ नवाज़  आमतौर पर जब भी मनुष्य के जीवन में कठिन समय आता है तो वह गंभीर अवसाद (depression) से पीड़ित हो जाता है। उदाहरण के तौर पर जब किसी का कोई प्रियजन क़रीबी इस दुनिया से प्रस्थान कर जाए, या किसी को गंभीर वित्तीय हानि हो जाए, या किसी को कोई बहोत घातक बीमारी निदान (diagnose) की गई हो, या ऐसे ही किसी का वैवाहिक जीवन गंभीर समस्याओं से ग्रस्त हो गया हो। आदि आदि ... परंतु इन सब समस्याओं में एक मनुष्य अकेले डिप्रेशन का शिकार होता है, जबकि बाकी दुनिया सामान्य चल रही होती है। सभी मुस्कुराते हुए प्रतीत होते हैं। आप को ऐसा लगता है कि केवल आप इस दुनिया में अकेले मनुष्य हैं जो इस गंभीर समस्या से दो चार हैं और पूरी तरह से टूट चुके हैं। इस समय दूसरों की खुशी और हंसी आपको और अधिक उदास कर रही होती है। क्योंकि न तो कोई आप के दुख को समझना और साझा करना चाहता है और न ही किसी के पास इसके लिए समय है। इस प्रस्थिति में जो आप के साथ सहानुभूति भी रखता हुआ दिखता है वो आप को खोखला और बनावटी लगता है। परंतु आज के इस #कारोना जैसी #महामारी से जूझ रही दुनिया म...